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कोलकाता में ED की बड़ी कार्रवाई, ₹280 करोड़ के बैंक घोटाले में 8 ठिकानों पर छापेमारी; झारखंड के पावर प्लांट से जुड़ा मामलाकोलकाता में ED की बड़ी कार्रवाई, ₹280 करोड़ के बैंक घोटाले में 8 ठिकानों पर छापेमारी; झारखंड के पावर प्लांट से जुड़ा मामला

कोलकाता में ED की बड़ी कार्रवाई, ₹280 करोड़ के बैंक घोटाले में 8 ठिकानों पर छापेमारी; झारखंड के पावर प्लांट से जुड़ा मामला

पश्चिम बंगाल में कथित 280 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने कोलकाता सहित राज्य के चार इलाकों में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक घोटाले की जांच से संबंधित है। जांच में झारखंड के एक पावर प्लांट से जुड़े धन को कोलकाता तक पहुंचाकर कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने का पहलू भी सामने आया है।

कोहिनूर पावर से जुड़े 280 करोड़ रुपये के मामले में कार्रवाई

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है। मामले में करीब 280 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की आशंका की जांच की जा रही है। ED अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर बैंक से प्राप्त धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इससे जुड़े वित्तीय लेन-देन किन लोगों तथा संस्थाओं के माध्यम से हुए।

इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से प्राप्त धन के इस्तेमाल और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच करना है। जांच एजेंसी को संदेह है कि मामले में दिवालियापन और कंपनी समाधान से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया हो सकता है।

कोलकाता समेत चार इलाकों में आठ परिसरों पर छापेमारी

ED की टीम ने पश्चिम बंगाल में कुल आठ आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई का दायरा कोलकाता के अलावा हुगली जिले के उत्तरपाड़ा, पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल और हावड़ा तक फैला रहा।

तलाशी के दायरे में ऐसे लोगों के आवासीय और कार्यालय परिसर शामिल बताए गए हैं, जिनकी भूमिका कंपनी से जुड़े अलग-अलग वित्तीय और कानूनी प्रक्रियाओं में संदिग्ध मानी जा रही है। इनमें कंपनी के निदेशक, ऑडिटर और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल से जुड़े ठिकाने भी शामिल हैं।

जांच एजेंसी इन लोगों की भूमिका और उनके बीच हुए लेन-देन की कड़ियों को समझने का प्रयास कर रही है। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के परिसर पर छापेमारी होने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी संलिप्तता या अपराध साबित हो गया है।

झारखंड के पावर प्लांट से कोलकाता तक पहुंचा कथित धन

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू झारखंड के एक पावर प्लांट से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पावर प्लांट से संबंधित धन को कथित तौर पर कोलकाता तक पहुंचाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

ED अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि धन का वास्तविक स्रोत क्या था, इसे किन खातों या कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया और इसके अंतिम लाभार्थी कौन हो सकते हैं। झारखंड से पश्चिम बंगाल तक फैले इस कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच से मामले का दायरा केवल एक कंपनी या एक स्थान तक सीमित नहीं रह गया है।

हालांकि, पावर प्लांट का नाम, धन के हस्तांतरण का पूरा तरीका और संबंधित लेन-देन की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

NCLT की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग की भी जांच

इस मामले में ED की जांच का एक अहम हिस्सा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कार्यवाही से जुड़ा है। NCLT वह न्यायिक संस्था है, जो कंपनियों से संबंधित दिवालियापन, ऋण समाधान और अन्य कॉरपोरेट विवादों पर सुनवाई करती है।

जांच एजेंसी को संदेह है कि NCLT की कुछ प्रक्रियाओं का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करके अपराध से प्राप्त धन को इस्तेमाल करने या उसका स्वरूप बदलने की कोशिश की गई हो सकती है। इसी वजह से जांच में रेजोल्यूशन प्रोफेशनल और कंपनी से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

ED यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति, ऋण समाधान की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं। इस पहलू की जांच से कथित बैंक धोखाधड़ी और उसके बाद धन के इस्तेमाल के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट और कथित शेल कंपनियों का कनेक्शन

मामले में कोलकाता के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। जांच एजेंसी ने कथित तौर पर शेल कंपनियां खोलने और करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के संबंध में भी जानकारी जुटाई है।

शेल कंपनियां ऐसी संस्थाएं हो सकती हैं, जिनका वास्तविक व्यावसायिक संचालन सीमित या नहीं के बराबर होता है और जिनका इस्तेमाल कुछ मामलों में वित्तीय लेन-देन की वास्तविक प्रकृति या लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी कंपनी का कम व्यावसायिक संचालन होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है।

ED इस पहलू की जांच के जरिए यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित वित्तीय नेटवर्क में कंपनियों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या उनका संबंध कोहिनूर पावर से जुड़े लेन-देन से था।

आगे की जांच में क्या हो सकता है?

आठ परिसरों पर हुई तलाशी के बाद जांच एजेंसी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर सकती है। इसके आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ, बैंक खातों और कंपनियों के लेन-देन की पड़ताल तथा धन के अंतिम लाभार्थियों की पहचान जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, फिलहाल छापेमारी में किसी की गिरफ्तारी, नकदी या अन्य संपत्ति की बरामदगी और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन पहलुओं पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कथित 280 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी में धन का इस्तेमाल किस तरह हुआ, झारखंड के पावर प्लांट से इसका क्या संबंध है और क्या NCLT की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के जरिए धन को दूसरे माध्यमों से स्थानांतरित किया गया।

फिलहाल ED की जांच इन सभी कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है। जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही मामले में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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