स्वास्थ्य में सुधार के बाद दक्षिण अमेरिका रवाना हुए पोप लियो XIV, 12 दिनों में करेंगे तीन देशों की यात्रा
वेटिकन: कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV ने फेफड़े की सर्जरी के कुछ सप्ताह बाद 12 दिवसीय दक्षिण अमेरिका दौरा शुरू कर दिया है। 6 नवंबर 2026 को रोम से उरुग्वे के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी सेहत को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच डॉक्टरों और चिकित्सा टीम का आभार भी व्यक्त किया।
पोप की यह यात्रा 6 से 17 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान वह उरुग्वे, अर्जेंटीना और पेरू जाएंगे। पोप बनने के बाद यह उनकी सबसे लंबी और महत्वपूर्ण विदेश यात्राओं में से एक मानी जा रही है। इस दौरे में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय समुदायों और सरकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात भी शामिल है।
13 अक्टूबर को हुई थी फेफड़े की सर्जरी
पोप लियो XIV की 13 अक्टूबर 2026 को सर्जरी हुई थी। इस दौरान उनके दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा हटाया गया था। वेटिकन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बीमारी फेफड़े के एक सीमित हिस्से तक थी और सर्जरी सफल रही।
चिकित्सकीय जांच के बाद बताया गया कि फिलहाल उन्हें अतिरिक्त कैंसर उपचार की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य में सुधार और डॉक्टरों की सलाह के बाद उनकी दक्षिण अमेरिका यात्रा को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।
सर्जरी के कुछ ही सप्ताह बाद इतनी लंबी यात्रा शुरू करना उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पोप ने स्वयं पत्रकारों से बातचीत में अपनी स्थिति को अच्छा बताया।
पत्रकारों से बोले- मैं काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं
रोम से उरुग्वे जाते समय विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पोप ने कहा कि उन्हें शुरुआत से विश्वास था कि वह यह यात्रा कर पाएंगे। उन्होंने चिकित्सा सहायता और उपचार में शामिल डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पोप ने बताया कि अस्पताल में रहने के अनुभव ने उन्हें बीमार लोगों की परिस्थितियों को और करीब से समझने का अवसर दिया। उनके अनुसार, इस अनुभव ने स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के प्रति उनकी जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया है।
उन्होंने ईश्वर में विश्वास, डॉक्टरों की देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली को इस कठिन दौर से गुजरने में मददगार बताया।
तीन देशों में होंगे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम
पोप लियो XIV की 12 दिवसीय यात्रा में दक्षिण अमेरिका के तीन देश शामिल हैं।
- उरुग्वे: यात्रा की शुरुआत 6 नवंबर को मोंटेवीडियो से हुई। यहां पोप धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और सरकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
- अर्जेंटीना: इस पड़ाव पर वह धार्मिक समुदायों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद करेंगे।
- पेरू: इस देश से पोप का पुराना जुड़ाव रहा है। यहां वह धार्मिक सभाओं, प्रार्थना कार्यक्रमों और स्थानीय समुदायों के साथ मुलाकात करेंगे।
तीनों देशों में यात्रा के दौरान अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें धार्मिक सभाएं, सामूहिक प्रार्थनाएं और सामाजिक संवाद प्रमुख रूप से शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवा को बताया हर व्यक्ति का अधिकार
पोप लियो XIV ने अपने अस्पताल में रहने के अनुभव का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की समान उपलब्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधा केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर व्यक्ति को बेहतर इलाज पाने का अवसर मिलना चाहिए।
उनके अनुसार, बीमारी के दौरान मरीजों को केवल चिकित्सा उपचार ही नहीं, बल्कि देखभाल, सहयोग और संवेदनशील व्यवहार की भी जरूरत होती है। अस्पताल में बिताए समय ने इस विषय के प्रति उनकी समझ को और गहरा किया है।
दक्षिण अमेरिका दौरे का उद्देश्य क्या है?
वेटिकन के अनुसार, इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दक्षिण अमेरिका के स्थानीय चर्चों के साथ संबंध मजबूत करना और लोगों के बीच विश्वास, आशा तथा शांति का संदेश पहुंचाना है।
दौरे के दौरान आर्थिक असमानता, आदिवासी समुदायों की स्थिति, अमेजन क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और चर्च की सामाजिक भूमिका पर भी संवाद होने की संभावना है। इन विषयों के जरिए पोप स्थानीय समुदायों की चुनौतियों और उनकी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
सर्जरी के बाद अंतरराष्ट्रीय दौरे पर दुनिया की नजर
फेफड़े की सर्जरी के कुछ सप्ताह बाद पोप लियो XIV का 12 दिवसीय विदेश दौरा उनके स्वास्थ्य और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने रवाना होने से पहले अपनी सेहत को लेकर भरोसा जताया है।
अब इस यात्रा के दौरान होने वाली धार्मिक सभाओं, सामाजिक मुलाकातों और उनके संदेशों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी। तीन देशों के दौरे में स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक समानता और शांति जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
